सचिन खरे
विश्व भाषा के रूप में हिन्दी की मान्यता बढ़ती जा रही है, आज पूरे विश्व में 172 विश्वविद्यालयों में हिन्दी में उच्च शिक्षण पाठ्यक्रम चालू किया जा चुका है । विश्व के सर्वोत्तम मानेजाने वाले अंगरेजी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने अमेरिकी देशवासियों से कहा है कि यदि अमेरिकीयों को विश्व में अपनी पहचान सुरक्षित रखना है और हिन्दुस्थानियों से आगे निकलना है तो उन्हें हिन्दी सीखना ही होगी।
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA) के वैज्ञानिकों ने जब अन्तरिक्ष की अन्य सभ्यताओं से संपर्क करने के लिए पूरे विश्व की सभी भाषाओं का विश्लेषण किया तब सबसे पहला स्थान संस्कृत और दूसरा स्थान हिन्दी भाषा को मिला है। हिन्दी के उच्चारण नियम मानव शरीर में कंठ (गले) के विभिन्न स्थान और जीव्हा (जीब) की प्रकृति के अनुसार मुहं से निकलने वाले सभी उच्चारणों के आधार पर निर्धरित किये गए है और यह एसी अद्वितीय भाषा है जो कि देवनागिरी लिपि में जैसी लिखी जाती है वैसी ही पढ़ी भी जाती ह ।
हिन्दी एकमात्र भाषा है जिसमें अध्यात्म, दर्शन, विज्ञानं, लोक साहित्य आदि किसी भी विषय के ज्ञान की अभिव्यक्ति अत्यंत सरल शब्दों में की जा सकती है।
राहुल गाँधी ने मध्य प्रदेश प्रवास पर कहा है कि रोटी, कपडा और मकान से पहले शिक्षा आवश्यक है और उससे भी पहले अंग्रेजी आवश्यक है । निश्चय ही जिसने कभी भारत की माटी का स्वाद नहीं चखा हो और जिसका बचपन परदेश में गुजरा हो वह कैसे इस देश से प्यार कर सकता है। राहुल गाँधी ने जो झूठा देशप्रेम ओढ़ रखा है वह अक्सर उनकी बातों से जाहिर हो जाता है।
विडम्बना यह है कि उनकी माता को हिन्दुस्थानियों के बीच अपनी बात रखने के लिए हिन्दी सीखनी पड़ी। हिन्दी समझने और बोलने वाले छात्र छात्राओं के सामने अंगरेजी की वकालत करते समय राहुल गांधी भी हिन्दी में ही बात कर रहे थे। भारत के 95% जनता हिन्दी समझती है 90% से ज्यादा लोग हिन्दी बोलते है।
आज हम सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने सभी कार्य हिन्दी में करते है। गूगल, याहू जैसी विदेशी इन्टरनेट कंपनियों ने हिन्दुस्थानियों के लिए इन्टरनेट पर हिन्दी में अपनीं सेवायें देना शुरू कर दिया है। यहाँ तक की अब हम हिन्दी के शब्दों को भी इन्टरनेट पर हिन्दी में लिखकर ढून्ढ सकते है । जब कंप्यूटर और इन्टरनेट जैसी तकनीक पर; जहां यह माना जाता था कि बिना अंगरेजी के काम नहीं चल सकेगा, वहां भी हिन्दी को पूजा जाने लगा है फिर राहुल गाँधी की यह बात कहीं से समझ में नहीं आती की अंगरेजी सबसे जरूरी है ...!
मानव जीवन के लिए सबसे जरूरी रोटी कपड़ा और मकान को छोड़ कर राहुल गांधी को शिक्षा सबसे जरूरी लगती है। समझ में नहीं आता कि भूखे पेट कैसे पढाई लिखाई हो सकती है उसपर भी अंगरेजी की वकालत करना राहुल गांधी की संकीर्ण और विदेशी मानसिकता को दर्शाता है।
केंद्र की यूपीए सरकार के अंगरेजी प्रेमी मंत्रियों को देश की जनता की गरीबी और जानलेवा महंगाई से ग्रसित आम जनता की कोई परवाह नहीं है । केंद्र की UPA सरकार ने पूरे देश वासियों को को ऐसी परिस्थिती में लाकर पटक दिया है कि अ़ब यहाँ कोई गरीबी की बात नहीं कर सकता क्योंकि दैनिक उपभोग की वस्तुएं अब माध्यम वर्ग की पहुँच से बाहर हो गयी है - लगता है कि केंद्र की UPA सरकार की यही नीति है कि सभी की ऐसी हालात बना दो कि ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी ...
हिन्दी हमारी मात्र भाषा है, देश की पहचान है, हिन्दी हिन्दुस्थान की राष्ट्र भाषा है हिन्दी हिन्दुस्थान को जोड़ती है और हम हमारे देश को खंडित करने वाले किसी भी षड़यंत्र का मुँहतोड़ जवाब देंगे और हिन्दी को विश्व भाषा बननें तक चैन से नहीं बैठेंगे ।
वन्दे मातरम।
(लेखक भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई के महामंत्री हैं)
सौजन्यःहिंदी मीडिया
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