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Thursday, February 4, 2010

किताबें झांकती हैं बंद अलमारी से

मीडिया डेस्क |  शुक्रवार , 22 जनवरी 2010
जयपुर में शुरु हुए साहित्य संगम में फिल्मी दुनिया से लेकर साहित्य जगत की कई नामी हस्तियाँ भागीदारी कर रही है। उद्घाटन सत्र में जाने माने निर्माता निर्देशक और गीतकार गुलजार ने कहा कि जब तक मैं अपनी जुबां में नहीं कहता, मेरी आत्मा जागृत नहीं होती। उन्होंने साहित्य के वर्तमान हालात को काव्य पंक्तियों में पिरोते हुए कहा-
किताबें झाँकती हैं बंद अलमारी के शीशे से, बड़ी हसरत से तकती है, महीनों मुलाकात नहीं होती।
बड़ी बेचैन रहती हैं किताबें, अब उन्हें नींद में चलने की आदत हो गई है।


समारोह की शुरआत जयपुर के डिग्गी पैलेस बने शिल्पग्राम जैसलमेर के छुल्ले खाँ समूह के शहनाई, नगाड़े और ताशों की धुनों पर दीप प्रज्जवलन से हुआ। उद्घाटन सत्र की शुरुआत कवि एवं अनुवादक अरविंद कुमार मेहरोत्रा के मुख्य उद्बोधन से हुई। उन्होंने कबीर के पदों का अंगे्रजी अनुवाद पढ़ा।  अरविंद ने साहित्यकार अरुण कोलाटकर की कविताओं का भी अंग्रेजी अनुवाद पढ़ा।
इस समारोह में भाग लेने के लिए अब तक फिल्म अभिनेता राहुल बोस, ओम पुरी, गुलजार, साहित्यकार अनन्या वाजपेयी, अशोक वाजपेयी, रोबर्टो कैलेसो, पंकज कुमार मिश्र, विक्रम चंद्र, देवदत्त पटनायक, पत्रकार मार्क टली जैसे जाने माने लोग यहाँ पहुँच चुके हैं।

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