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Wednesday, February 3, 2010

यात्रा वृतांत / प्यार की बात

आपकी कविता का कायल तो मैं पहले से था। आज आपके इस यात्रा वृतांत को पढ़कर मैं आपकी घुम्मकड्ड़ी लेखन का भी मुरीद हो गया। एक लंबे असे$ के बाद में अपने लोगों के बीच आया हूं। आप इसी तरह तरक्की करते रहें। नए वष$ की शुभकामनाअों के साथ वेलेंटाईन की भी ढेर शुभकामनाएं
प्यार से इस मौसम में आइए कुछ प्यार की बात करें---
प्यार की बात
प्यार की बात बड़ी मीठी-मीठी लगती है।
प्यार हो जाए तो भूख नहीं जगती है।
प्यार को दूर से देखो तो मजा आता है।
प्यार को पदे$ मे रखो तो सजा पाता है।
प्यार है हीर की पूजा, लैला की इबादत है।
प्यार फरहाद के लिए पुरानी आदत है
प्यार को प्यार करो दूर से महसूस करो।
प्यार में होश गंवाया तो रहा प्यार कहां?
प्यार में प्यार को पाया तो रहा प्यार कहां?
प्यार है मस्ती, प्यार दूर का नजारा है
प्यार मैसम का रंगीन सा फुहारा है
प्यार को बांट के हर कोई प्यार पाता है
हर कोई प्यार करो दीन-दुखी जो भी मिले
प्यार का इजहार करो मन में अगर फूल खिले।।
अशोक मनोरम

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