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Thursday, February 4, 2010

एक अहसास का नाम है मां

आज ब्लॉग तलाशते-तलाशते मैं भारतीयम तक पहुंच गई। वहां अरविंदजी की कविता मां पढ़ी अच्छी लगी उसे पोस्ट कर रही हूं-
भाई समीरलाल (उड़न तश्तरी)ने मां को याद किया तो प्रतिक्रिया स्वरूप मुझे मेरी वह " मां" शीर्षक रचना याद आ गयी ,जो वर्षों पहले मेरे संग्रह " चीखता है मन " में प्रकाशित हुई थी. भाई समीरलाल जी को समर्पित रचना पेश है:

अपने आगोशोँ मे लेकर मीठी नीँद सुलाती माँ
गर्मी हो तो ठंडक देती, जाडोँ मेँ गर्माती माँ

हम जागेँ तो हमेँ देखकर अपनी नीँद भूल जाती
घंटोँ,पहरोँ जाग जाग कर लोरी हमेँ सुनाती माँ

अपने सुख दुख मेँ चुप रहती शिकन न माथे पर लाती
अपना आंचल गीला करके ,हमको रहे हंसाती माँ

क्या दुनिया, भगवान कौन है, शब्द और अक्षर है क्या
अपना ज्ञान हमेँ दे देती ,बोली हमे सिखाती माँ

पहले चलना घुट्ने घुट्ने और खड़े हो जाना फिर
बच्चे जब ऊंचाई छूते बच्चोँ पर इठलाती माँ

उसका तो सर्वस्व निछावर है,सब अपने बच्चों पर,
खुद रूखा सूखा खा लेती है, भर पेट खिलाती मां.


जब होती है दूर हृदय से प्यार बरसता रहता है
उसकी याद बहुत आती है, आंखे नम कर जाती मां

अरविन्द चतुर्वेदी

4 comments:

Udan Tashtari said...

अरविंद जी की रचना बहुत उम्दा है..कुछ शब्द नहीं तारीफ को...

Udan Tashtari said...

राजमणि जी का ईमेल यदि संभव हो तो मुझे sameer.lal AT gmail.com पर भिजवाने का कष्ट करें.

निर्मला कपिला said...

बहुत सुन्दर है माँकी महिमा अर्विन्द जी को बधाई

डा.अरविन्द चतुर्वेदी Dr.Arvind Chaturvedi said...

आप सभी को रचना पसन्द आयी और रचना के मध्यम से मां की याद आयी. बस मेरी रचना आप के प्यार और मां के आशीर्वाद से धन्य हुई.
आप सभी का आभार