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Tuesday, February 9, 2010

उस ने बाँहों में समां रखे थे दरिया ...


भीड़ में रिश्तों की इस दिल को अकेला देखा

ज़िन्दगी ऐसा भी हमने तेरा चेहरा देखा

अब तो बंद होने की आँखों को इजाजत दे दे

बरसों आँखों ने तेरा जाग के रास्ता देखा

उम्र भर साथ चले फिर भी रहे हम तनहा

हम ने कुर्बत में भी फासला ऐसा देखा

उस ने बाँहों में समां रखे थे दरिया लेकिन

हमने साहिल को जो देखा भी तो प्यासा देखा ...

प्रस्तुति: अनिल (१०.०२.२०१० अप १.०० बजे )

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