यह मंच आपका है आप ही इसकी गरिमा को बनाएंगे। किसी भी विवाद के जिम्मेदार भी आप होंगे, हम नहीं। बहरहाल विवाद की नौबत आने ही न दैं। अपने विचारों को ईमानदारी से आप अपने अपनों तक पहुंचाए और मस्त हो जाएं हमारी यही मंगल कामनाएं...
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Tuesday, February 2, 2010
विवेकानंद के सुभाषित
उत्तिष्ठ जाग्रत पाप्य वराण्य बोधत
उठो, जागो और जो लक्ष्य है उसे जानकर प्राप्त करो
-स्वामी विवेकानंद
प्रस्तुत है उनके बहुमूल्य वचन । आशा है आपको पसंद तो आएंगे ही आप इन्हें अपने जीवन में भी उतारेंगे।
2 comments:
बढिया प्रस्तुति।धन्यवाद।
bahut hi behtarin.
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