Search This Blog

Wednesday, February 24, 2010

जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आँखें हँस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली

















                             मीना कुमारी की शायरी
टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आँखें हँस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली

जन्म: 01 अगस्त 1932
निधन: 31 मार्च 1972
उपनामनाज़
जन्म स्थानमुम्बई, महाराष्ट्र, भारत
कुछ प्रमुख
कृतियाँ
तन्हा चाँद (गुलज़ार द्वारा संकलित)
विविधमीना कुमारी भारतीय हिन्दी सिनेमा की एक बहुत मशहूर अभिनेत्री थीं।
जीवनीमीना कुमारी / पर
जब चाहा दिल को समझें, हँसने की आवाज़ सुनी
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मात मिली

मातें कैसी घातें क्या, चलते रहना आठ पहर
दिल-सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ मिली

होंठों तक आते आते, जाने कितने रूप भरे
जलती-बुझती आँखों में, सादा-सी जो बात मिली

1 comment:

शारदा अरोरा said...

जैसे ही चिठ्ठा जगत पर आई ,देखा कि आपकी पोस्ट में वही लफ्ज़ हैं जो कभी मैंने भी गुनगुनाये हैं ...मेरे अर्धचेतन मस्तिष्क में ये पंक्तियाँ घूमती रहतीं थीं ...और ये दोनों पंक्तियाँ भी अच्छी बन पडीं हैं |
रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आँखें हँस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली ......
और अब ये पंक्तियाँ भी पढ़ लें

जिसकी जितनी झोली

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता और धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसकी जितनी झोली थी उतनी ही सौगात मिली

लाख लगे हों दिल पर पहरे , अपनी ही औकात मिली
भर तो लेते दामन अपना , बात नहीं बेबात मिली

चाँद भी उतरा तारे भी उतरे , फ़िर भी न उजली रात मिली
जहन सजाये बैठे हैं हम , यादों की बारात मिली

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता और धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसकी जितनी झोली थी उतनी ही सौगात मिली