Search This Blog

Wednesday, February 24, 2010

ना-खुदा की क्या शिकायत कीजिये ...

आप दुनिया भर से उल्फत कीजिये

मुझको मेरा दिल इनायत कीजिये

जब्त से क्या खून -ए- हसरत कीजिये

एक नाला कर के फुर्सत कीजिये

जौफ कहता है के मंजिल दूर है

शौक कहता है कि हिम्मत कीजिये

गर्क ही होना था मंज़ूर -ए-खुदा

ना-खुदा की क्या शिकायत कीजिये

मेरे मोहसिन जहाँ तक हो सके

अपने दिल में जब्त -ए-उल्फत कीजिये

( naalaa : cry; zoaf : weakness)

प्रस्तुति: अनिल (२५.०२.२०१० अप १२.०० बजे )

No comments: