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Wednesday, February 10, 2010

उल्लू और गधे की कविता बहुत अच्छी लगी।

आदरऩीय नीरवजी
आपकी उल्लू और गधे की कविता बहुत अच्छी लगी। विपिनजी का आपने विस्तारपूर्वक परिचय देकर नेक काम किया है। आजकल भगवान सिंह हंस ज्योतिषी हो गे हैं लगता है आपकी संगत का असर हो गया। मकबूलजी,अनिलजी और राजमणिजी खूब लिख रहे हैं। ज्ञनेन्द्रजी तो सदस्य बनने के बाद दिखे ही नहीं। कहां ला पता हैं। बीच-बीच में कुछ अच्छे लेख भी पढ़ने को मिल रहे हैं। आज जावेद अख्तर और अहमद फराज की ग़ज़ले पढ़ी बहुत उमदा ग़ज़ले हैं। आपको बधाई।
डॉ. मधु चतुर्वेदी

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