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Sunday, February 14, 2010

वैलेन्तिएन डे special

आप सभी बंधुओ को मेरा सदर प्रणाम
सभी को एक कविता पेश करता हू

किस्मत पर एतबार किसको है
मिल जाये खुसी इंकार किसको है
कुछ मजबूरिय है मेरे दोस्त
वरना जुदाई से प्यार किसको है
कल न फिर ये समा होगा
हम में से कौन नजाने कहाँ होगा?
मुरझाये फूल तो मोल जायेंगे कितबों में
पैर बिच्च्दे दोस्तों का शयद ही कोई पता होगा
दोस्त दोस्त से खफा नहीं होता
प्यार प्यार से जुदा नहीं होता
भुला देना मेरी कमियों को
क्योंकि इंसान कभी खुदा नहीं होता
ये सफ़र दोस्ती का कभी ख़तम न होगा
वादा तो नहीं करते दोस्ती निभाएंगे
कोशिश यही रहेगी आपको नहीं सतायेंगे
जरुरत पड़े तो दिल से पुकारना
मरते भी होंगे तो मोहलत लेकर आयेंगे।
-अवनीश श्रीवास्तव डिजायनर

1 comment:

alka mishra said...

ham aapki bhawnao ka swagat karte hain,sadhuwad

माननीय ,
जय हिंद
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यह
शिवस्त्रोत

नमामिशमीशान निर्वाण रूपं
विभुं व्यापकं ब्रम्ह्वेद स्वरूपं
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाश माकाश वासं भजेयम
निराकार मोंकार मूलं तुरीयं
गिराज्ञान गोतीत मीशं गिरीशं
करालं महाकाल कालं कृपालं
गुणागार संसार पारं नतोहं
तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं .
मनोभूति कोटि प्रभा श्री शरीरं
स्फुरंमौली कल्लो लीनिचारु गंगा
लसद्भाल बालेन्दु कंठे भुजंगा
चलत्कुण्डलं भू सुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननम नीलकंठं दयालं
म्रिगाधीश चर्माम्बरम मुंडमालं
प्रियं शंकरं सर्व नाथं भजामि
प्रचंद्म प्रकिष्ट्म प्रगल्भम परेशं
अखंडम अजम भानु कोटि प्रकाशम
त्रयः शूल निर्मूलनम शूलपाणीम
भजेयम भवानी पतिम भावगम्यं
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्ज्नानंददाता पुरारी
चिदानंद संदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी
न यावत उमानाथ पादार विन्दम
भजंतीह लोके परे वा नाराणं
न तावत सुखं शान्ति संताप नाशं
प्रसीद प्रभो सर्व भूताधिवासम
न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोहम सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यं
जराजन्म दुखौ घतातप्य मानं
प्रभो पाहि आपन्न मामीश शम्भो .