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Sunday, April 4, 2010

शाबाश अनिल भाई

भाई अनिलजी आप तो ग़ज़ब ढा रहे हैं। नया-से-नया माल ला रहे हैं।
ग़ज़ब ढा रहे हैं ग़ज़ब ढा रहे हैं
हमारी बधाई दर्ज करो भाई
पं.सुरेश नीरव

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