
पंडितजी आपको बहुत-बहुत बधाई जो आपने विदेशों में बने वेंकतेस्वर मंदिर, शिव मंदिर , नारायण मंदिर ,विष्णु मंदिर आदि की भव्य प्रदर्शनी ही नहीं दिखाई बल्कि विदेशों में चाहे कम्बोडिया हो, चाहे यूके हो, चाहे अमेरिका हो और चाहे केलिफोर्निया हो एक हमारी वैदिक परम्परा में हमारे प्रवासी भारतीयों के द्वारा अपनी मूल धार्मिक आस्था, सभ्यता और संस्कृति का दिग्दर्शन कर रहे हैं। वे अपनी ज़मीर और ज़मीन को नहीं भूले हैं बल्कि उनको और गौरवान्वित किया है। ये सब चीजें हमें वीजा और पासपोर्ट लेकर भी नहीं देख सकते हैं। वे हमारे लिए बहुत ही दुर्लभ हैं। धन्य हैं पंडितजी आप। आप हमें दुनिया की सैर करा रहे हैं। ये मंदिर ही हमारी , वैदिक सभ्यता और संस्कृति की धरोहर हैं । जहाँ मन है वहां मंदिर भी अवश्य बनेगा। एक बात कहूँ, आज मैंने गजेन्द्र सिंह चौहान को फोन किया तो उन्होंने कहा कि आपके साथ पंडित सुरेश नीरव बहुत विद्वान् व्यक्ति हैं। हम सबको उनका सानिध्य जो मिल रहा है। नीरवजी आपका फोन आ रहा है। अब फोन पर आपके साथ। जय लोकमंगल। भगवन सिंह हंस।
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