धृतराष्ट्र के एक सौ एक पुत्र और एक कन्या थी। उनमें दुर्योधन सबसे बड़ा और युयुत्सु सबसे छोटा था। मैं सबके नाम न लिखकर पांच के अन्तराल पर आये नाम ही लिख रहा हूँ-1-दुर्योधन ५- जलसन्ध १०- दुर्धर्ष १५-दुष्कर्ण २०-सत्व २५-चारुमित्र ३०- विकतानन ३५-चित्रबाण ४०- महाबाहु ४५- बलाकी ५०- महोदर ५५- द्रढ़वर्मा ६०- जरासंध ६५-सेनानी ७०- दुराधर ७५- आदित्यकेतु ८०- क्रथन ८५- अलोलुप ९०- कुण्डभेदी ९५- दीर्घबाहु और १००- विरजा । ये सौ पुत्र गांधारी के गर्भ से हुए थे। धृतराष्ट्र की सेवा एक वैश्यकन्या करती थी। उसके गर्भ से उसी साल धृतराष्ट्र के युयुत्सु नामक पुत्र हुआ जो बड़ा यशस्वी और विचारशील था। गांधारी के गर्भ से एक कन्या का भी जन्म हुआ था। कन्या का नाम दुश्शला था। दुश्शला का विवाह राजा जयद्रथ के साथ हुआ था। राजा धृतराष्ट्र के ये सभी १०१ पुत्र बड़े शूरवीर, युद्धकुशल और शास्त्रों के विद्वान् थे। इन पुत्रों के जन्म की कहानी बड़ी विचित्र है। फिर कभी-----।
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