यह मंच आपका है आप ही इसकी गरिमा को बनाएंगे। किसी भी विवाद के जिम्मेदार भी आप होंगे, हम नहीं। बहरहाल विवाद की नौबत आने ही न दैं। अपने विचारों को ईमानदारी से आप अपने अपनों तक पहुंचाए और मस्त हो जाएं हमारी यही मंगल कामनाएं...
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Tuesday, September 7, 2010
सर्वमंगल मांगल्ये
आज श्री अशोक मनोरम ने हमें यह श्लोक भेजा है,एक मुद्दत बाद चलो उन्हें जय लोकमंगल की याद तो आई। बधाई.. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्ध साधिके शरन्य त्रय्म्विके गोरी Nअरयानी नमस्तुते.. अशोक मनोरम
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