आदरणीय नीरव जी ,
पिछले काफी दिनों से आप एतिहासिक ग्रंथो पर लिख रहे है
अरण्यक ,नेमिशारण आदि पर आप जो प्रकाश डाल रहे है वह आने
वाली पीढियों के लिए ज्ञान वर्धक है परन्तु आज आपने लोकतंत्र के चौथे
स्तंभ की वर्तमान भूमिका पर जो व्यंग लिखा है वह आज की आवश्यकता
है आप एक अंतर्राष्ट्रीय कवि,ख्यातिप्राप्त लेखक के साथ -साथ एक देश भक्त
जागरूक नागरिक की भूमिका भी निभा रहे है वास्तव मे पत्रकारिता के नाम
पर मीडिया जो परोस रहा है वह चिंतनीय है सूचना के नाम पर सनसनी फैला कर अपनी टी आर पी बढ़ाना प्रतिबंधित किया जाना चाहिए
आज के व्यंग के लिए मेरी बधाई स्वीकार करे सादर चरण स्पर्श
रजनी कान्त शर्मा राजू
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