प्रतिक्रियाएं-
सार्थक और अदभुत इटरनेटी कवि सम्मेलन
आदरणीय नीरवजी,
जयलोकमंगल के मंच पर आपने अदभुत कवि सम्मेलन का आयोजन किया है। एक साथ इतने कवियों की रचनाएं पढ़ने को वैसे हमें और कहां मिल पातीं। संचालन का कौशल आपका इस इंटरनेटी कवि सम्मेलन में भी देखने को मिला। विविध विषयों पर अनेक लोकप्रिय कवियों की रचनाओं ने काफी मानसिक खुराक प्रदान की। गांधी जयंती पर इससे अच्छा और क्या तोहफा हो सकता था। आपको बधाई..
-डाक्टर प्रेमलता नीलम
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आपकी सूझबूझ के तो आदरणीय नीरवजी, हम हमेशा से ही कायल रहे हैं। मगर इंटरनेटी कवि सम्मेलन का सफल आयोजन कर एक बार फिर आपने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा ही दिया है। डाक्टर प्रेमलता नीलम,भगवानसिंह हंस,रजनीकांत राजू, भगवान स्वरूप चैतन्य, मधु मिश्रा,मधु चतुर्वेदी और दया निर्दोषी की कविताएं अच्छी लगीं। योगेन्द्र मुदगल,पुरुषोत्तम वज्र और ओंकार गुलशन की रचनाएं अतिथि कविताएं रहीं। अच्छा हो इस प्रयोग को आप समय-समय पर दोहराते रहें। जिससे लोगों का जुड़ाव और व्यापक होगा।
आपको प्रणाम..चरण स्पर्श..
-मुकेश परमार
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सिलसिला आगे बढ़ता रहे
भई वाह..
दोहे,छंदमुक्त कविताएं,गीत,ग़ज़ल, हास्य-व्यंग्य सभी कुछ मिला है इस इंटरनेटी कवि सम्मेलन में। ऐसे आयोजनों से बढ़ती है ब्लाग की प्रामाणिकता। और निखरता है उसका वर्ग चरित्र। इस अनुष्ठान से बहुआयामी छवि बनी है जयलोकमंगल की। भविष्य में भी ऐसे संयोजन होते रहने चाहिए। संयोजक भगवानसिंह हंस और संचालक पंडित सुरेश नीरव दोनों ही बधाई के हकदार हैं। सिलसिला आगे बढ़ता रहे इन मंगल कामनाओं के साथ..
डाक्टर मधु चतुर्वेदी
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