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Monday, October 4, 2010


मोगांबो खुश हुआ
आदरणीय नीरवजी,
आपने जयलोकमंगल के आकाश में व्यंग्यकार बनाकर टांका दिया है और एक बड़े-विशाल पाठक वर्ग की तरफ हांक हिया है उसके लिए मे दिल से शुक्रगुजार हूं।आपका ऐसा ही सहयोग मुझे मिलता रहे और मेरा मन का फूलयूं ही खिलता रहे पानीपत के पानीदार शायर की यही दुआएं हैं। इंटरनेटी कवि सम्मेलन देखा अच्छा लगा। बधाई .मेरे भाई

योगेन्द्र मौदगिल्य (पानीपत)
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पहली-पहली बार

आज पहली बार मैं ब्लाग पर अपनी ग़ज़ल के साथ प्रगट हुआ हूं।

बहुत खुशी हुई कि तमाम लोगों ने मेरी गजल को पढ़कर मेरी तारीफ की है। इसकेलिए मैं पंडित सुरेश नीरव को दिल से बधाई देना चाहूंगा जिन्होंने नेट के जरिए मुझे एक व्यापक वर्ग से मिला दिया भविष्य में भी जयलोकमंगल के पाठकों से मुलाकात होती रहेगी,इस उम्मीद के ...साथ....
-औंकार गुलशन (मेरठ)

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