
आज नीरवजी ने जयलोकमंगल के मैदान में मंगल का गंगल आयोजित किया है। और ये भी देखा कि सबसे ज्यादा जल्दी लोगों के विचार भी इस मुद्दे पर आए हैं। यह इस बात का सबूत है कि लोग ब्लाग पढ़ते हैं और इस मुद्दे को काफी गंभीरता से ले रहे हैं। मुझे तुलसीदासजी की चौपाई याद आती है- भय हिन प्रीत न होत॥धर्म हमें भय सिखाता है बुरे कामों के प्रति। इस्लाम में शराब हराम है सिक्ख पंथ में सिगरेट। यदि मंगलवार हमें शराब और मांसाहार से दूर रखता है तो यह मंगल का स्वभाव ही है। मंगल कभी अमंगल नहीं कर सकता। और जयलोक मंगल का उद्देश्य भी मंगलमय ही है इसीलिए नीरवजी ने यह मुद्दा उठाया है।
-भगवानसिंह हंस
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