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Tuesday, October 5, 2010

मंगलमय मंगल

सुरेश जी ने जो आज बहस छेड़ी है उस पर मझे यह कहना है कि मंगल तो मंगलकारी है । अतः किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त नहीं होना चाहिए । वैसे इस मौके पर निदा फाजली का एक दोहा प्रासंगिक लगता है -
सातों दिन भगवान् के ,क्या मंगल क्या पीर ।
जिस दिन सोए देर तक ,भूखा रहे फकीर ॥

राजमणि

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