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Tuesday, October 5, 2010

।हनुमान जी मेरे लिए निष्ठा के ऐसे उत्तुंग शिखर

पिछले कई दिन या यों कहिए महीनों से लोकमंगल से गायब हूं बकौल राजमणि जी के ब्लाग जगत मे किसे किसकी फिक्र है कि कौन कहां है?पर लोकमंगल को पुष्पित पल्लवित होते लगातार देख रहा हूं।आज भी देखा तो पाया कि महावीर हनुमान विराजमान हैं।सर्वप्रथम तो नीरव जी को बधाइ जो वे बिल्कुल अनछुए विषय को न केवल ब्लागजगत अपितु साहित्यजगत की केंद्रीय चर्चा का विषय बना देते हैं।हनुमान जी मेरे लिए निष्ठा के ऐसे उत्तुंग शिखर हैं जो विश्वास और आस्था को बडे से बडे संकट मे भी डिगने नहीं देते बाबा तुलसीदास को वे यदि बचपन मे हनुमान चालीसा की प्रेरणा देते हैं तो चित्रकूट के घाट पर प्रभू के दर्शन भी करवाते हैं।बोलो बजरंगबली की जय। अरविंद पथिक

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