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Thursday, October 7, 2010

बृहद भरत चरित्र महाकाव्य टिका सहित

कुछ अंश आप तक -----

हंस जग में सराहि, सुख दुःख निरख समान।
कर्त्तव्यपरायणता हि, मानव की पहचान । ।
महाकवि हंसजी कहते हैं कि संसार में जो मनुष्य सुख-दुःख को समान देखता है उसकी लोग बहुत सराहना करते हैं। कर्त्तव्य परायणता ही मानव की पहिचान होती है।
सासू का साहस भरा , अन्तः में अकुलाय ।
वधु ने नन्दीग्राम हेतु, मंत्री लिया बुलाय । ।
सासू माता कौशल्या ने मांडवी को साहस दिलाया। मांडवी को वह साहस अन्तः में अकुलाने लगा । वधु मांडवी ने नंदीग्राम जाने के लिए मंत्री सुमंत्र को बुलवा लिया।
हर दुःख में सहायक काका। अवध बिलोक जस मनुज फाका। ।
मुंडेर लगतीं सर्व सूनी । मम समस्या दिनोंदिन दूनी । ।
काका! आप इस परिवार के हर सुख और दुःख में सहायक रहते हैं। काका ! अयोध्या को देखो कैसी लग रही है जैसे मनुष्य फाका। अयोध्या की सारी मुंडेर सूनी लगती हैं, उन्हें देखकर मेरी समस्या दिन प्रति दिन बढ़ती जाती है।

योगेश विकास

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