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Wednesday, October 6, 2010

आप प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो भारतीय जनरल क्यों नही बन सकता

प्रेरक-प्रसंग-

अब नहीं मिलते ऐसे खुद्दार लोग जो नतीजे की परवाह किये बिना वह कहते हैं जो कि सच है।
 इतिहास के एक ऐसे ही अनछुए पन्ने से आज मैं आप सबको वाकिफ करा रहा हूं। जो आपको बताएगा कि आज के आईएएस अफसरों और विदेश सचिव  बनने के लिए आतुर अफसर राजनेताओं की चाटुकारिता नहीं किया करते थे बल्कि प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के आगे खड़े होकर अपनी बात कहने की दमखम रखते थे।
लेफ्टीनेंट जनरल ठाकुर नाथू सिंह एक ऐसे ही निर्भीक सेना अधिकारी थे। औजादी के तुरंत बाद भारत का प्रथम जनरल कौन हो इसकेलिए सिलेक्शन कमेटी की मीटिंग पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हो रही थी। जवाहरलाल नेहरू  और सैना अधिकारी विचार-विमर्श कर रहे थे। तभी जवाहरलाल नेहरू  ने कहा कि हमारी सेना में ऐसा कोई अधिकारी नहीं है जिसे जनरल का अनुभव हो। पहली बार किसी भारतीय को यह मौका मिलेगा मगर अनुभव न होने के कारण मैं चाहता हूं कि किसी ब्रिटश अफसर को जनरल बनाया जाए। सभी ने जवाहरलाल नेहरू की बात का समर्थन किया। मगर तभी लेफ्टीनेंट जनरल ठाकुर नाथू सिंह खड़े हो गए और उन्होंने कहा कि- जब प्रधानमंत्री पहली बार भारतीय बन सकता है जो सेना का जनरल कोई भारतीय कैसे नहीं बन सकता। पूरी सभा में सन्नाटा छा गया। नेहरूजी ने पूछा कि क्या तुम यह पह स्वीकार कर सकते हो तो लेफ्टीनेंट जनरल ठाकुर नाथू सिंह ने कहा कि मुझसे भी योगय मेरे अफसर करिअप्पा साहब यहां बैठे हैं और वह इस पद के उपयुक्त हैं,तो नेहरूजी ने उन्हे यह पद दिया। यह प्रसंग एक व्यक्ति की निर्भीकता कि जो प्धानमंत्री का भी विरोध करने की हिम्मत रखता हो और त्याग की मिसाल कि यह कि स्वयं पद न लेकर दूसरे का नाम प्रस्तावित कर दे ऐसी मिसाल आज कहां मिलती है। लेफ्टीनेंट जनरल ठाकुर नाथू सिंह जैसे लोगों की आज हिंदुस्तान को जरूरत है।
पंडित सुरेश नीरव
 










Everybody supported Nehru because if the PM was suggesting something, how could they not agree?





But one of the army officers abruptly said, "I have a point, sir."

Nehru said, "Yes, gentleman. You are free to speak."

He said ,"You see, sir, we don't have enough experience to lead a nation too, so shouldn't we appoint a British person as first PM of India?"



The meeting hall suddenly went quiet.

Then, Nehru said, "Are you ready to be the first General of the Indian Army ?"



He got a golden chance to accept the offer but he refused the same and said, "Sir, we have a very talented army officer, my senior, Lt. Gen. Cariappa, who is the most deserving among us."

The army officer who raised his voice against the PM was Lt. General Nathu Singh Rathore, the 1st Lt. General of the Indian Army.

That is the professionalism and character the military is made of .................























































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