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Tuesday, October 19, 2010

बृहद भारत चरित्र महाकाव्य

राम का आस्तिक मत -
वह कलुषित कभी न सम्माना। सत्पुरुषों में न गिना जाना।
कर्त्तव्य कसौटी आचारा । सत्य बताएं किस आधारा । ।
हे मुनि! वह कलुषित व्यक्ति समाज में कभी सम्मान नहीं पता हैऔर उसकी गिनती सत्पुरुषों में नहीं होती है। कर्त्तव्य , कसौटी और आचार सत्य बताते हैं कि उसका क्या आधार है। राम ने कहा।
कौन श्रेष्ट कुल प्रादुर्भावा। कौन अधम कुल कलुषित भावा। ।
कौन दिखाय पौरुष प्रभावा। कौन करे व्यर्थ ही दिखावा । ।
राम ने मुनि से कहा कि कौन श्रेष्ठ कुल में जन्मा है । कौन अधम कुल में जन्मा है। किसके कलुषित भाव हैं। कौन पौरुष का दिखावा करता है। कौन व्यर्थ दिखावा करता है।
कौन शुचि वचन पावन मूला। कौन प्रपंची जस दृग शूला। ।
कौन जग में सन्मार्ग गामी । कौन लोलुपी अकर्म कामी। ।
किसके शुचि वचन पवित्र मूल हैं। कौन प्रपंची काँटे कि तरह दिखाई देता है। कौन संसार में सन्मार्ग पर चलता है। कौन पुरुष लालची , दुष्कर्मी और कामी है।
मुनि! आपने कहा जो कार्या। श्रेष्ठ -सा बिलोक पर अनार्या। ।
द्रष्टिपात जस संयम शीला। पर बहु विषादमय दुहशीला । ।
राम ने कहा - मुनि! आपने जो कार्य बताया है वह श्रेष्ठ-सा दिखाई देता है परन्तु वह अनार्यों के लिए है। संयमशील उस पर द्रष्टिपात भी करें तो वे बहुत विषादमय और दुखी होंगे।
रचयिता - भगवान सिंह हंस
प्रस्तुति -योगेश विकास

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