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Saturday, November 20, 2010

बृहद भरत चरित्र महाकाव्य

कैकेयी-एक विदुषी पटरानी -
दोहा- शादी को कुछ दिन हुए, देवासुर संग्राम।
अवधेश को विजय मिली, सारथि ललित ललाम। ।
शादी को कुछ ही दिन हुए थे कि देवासुर संग्राम छिड़ जाता है। महारानी कैकेयी राजा की उस संग्राम में निपुण एवं अद्भुत सारथि बनती है। राजा दशरथ को उसमें विजय प्राप्त होती है।
वीरांगना का परिचय , नृप के प्राण बचाय।
कीली स्व अंगुली बनी, कौशल दिया दिखाय। ।
रानी कैकेयी का परिचय राजा के युद्ध में प्राण बचाने से होता है। राजा के रथ की धुरी की कीली टूट जाती है। उस युद्ध में रानी कैकेयी की अंगुली रथ की कीली बनती है। ऐसा करके रानी कैकेयी ने उस युद्ध में अद्भुत कौशल का परिचय दिया।
ऐसी पवित्र दशरथ नारी। सुरलोक में नौका विहारी। ।
सशरीर गए दोऊ प्राणी। कैकेयी सुलोक सम्मानी। ।
राजा दशरथ की ऐसी पवित्र रानी कैकेयी है। दोनों प्राणी इंद्र के निमंत्रण पर सशरीर इंद्रलोक गए। वहाँ राजा दशरथ और रानी कैकेयी अमरपुरी में नौका विहार करते हैं। महारानी कैकेयी इंद्रलोक में बड़ी सम्मानित होती है।
यह सौभाग्य नहीं न्र पाया। दोनों की है विशुद्ध काया। ।
सत्यवृत्ति सत्पथ की गामी। इंद्र का निमंत्रण परिणामी। ।
सशरीर स्वर्ग जाने का सौभाग्य किसी मनुष्य को नहीं मिला है। राजा दशरथ और रानी कैकेयी की पवित्र काया है। और वे दोनों सत्यवृत्ति सत्पथ के गामी हैं। इंद्रदेव का निमंत्रण भी परिणामी है क्योंकि इंद्र सशरीर किसी को स्वर्गलोक में नहीं बुलाते हैं।
अमरपुरी में मास गुजारे । अद्भुत द्रश्य दम्पति निहारे। ।
इन्द्रेश की शची पटरानी। कैकेयी की कर अगवानी ।।
राजा और रानी ने अमरपुरी में महीनों गुजारे। दम्पति ने वहाँ अद्भुत-अद्भुत द्रश्य देखे। इंद्र की पटरानी शची महारानी कैकेयी की अगवानी करती है।
दिया दिव्यव्यंजन बहु सारा। पुन्यकार्य दम्पति संसारा। ।
झूला झूले दशरथ रानी। झोटा देती सुरपुर रानी। ।
इंद्र और रानी शची ने स्वयं अपने हाथों से दम्पति को दिव्य व्यंजन परोसे। राजा दशरथ और महारानी कैकेयी का संसार में बड़ा पुन्यकर्म है। महारानी कैकेयी इंद्रलोक में झूला झूलती है और इंद्रलोक की महारानी शची झोटा देती है।
रचयिता- भगवान सिंह हंस
प्रस्तुति - योगेश विकास
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