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Sunday, November 14, 2010

नमस्कार
बाल दिवस पर मेरी नन्ही सी कविता

लला सोया है

न दे बाँग अभी मुर्गे
न चीं-ची कर चींचीं
होले से बह पवन बसंती
के सोया हैनटखट
अभी दुबक कर रजाई में

तुम्हे देख वो
दौड़ आएगा नंगे पाँव
तुमरे संग खेलन को
तुम उड़ जाओगे
छोड़ जाओगे
मेरे लला को रोवन को
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