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Wednesday, November 10, 2010

मंजुजी लिखती रहें और दिखती रहें.

रोज़ हम सभी से ऐसे ही रू-ब-रू होती रहें,मंजुजी,पांडेजी ने ठीक कहा है। एक अच्छी कविता के साथ उन्होंने ब्लाग की नागरिकता ली है। और ये नागरिकता परमनेंट ग्रीन कार्ड का दर्जा हासिल करे,मेरी शुभकामनाएं। मंजुजी लिखती रहें और दिखती रहें...आमीन..
मधु मिश्रा
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