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Friday, December 31, 2010

बर्फीली आतिशें .........

              धोलाधार पर्वत श्रंखला की यही वो बर्फीली आतिशें हें जिनमें
       "नीरव "जी घिर गए थे ! यथार्थ मेडिटेशन की आध्यात्मिक 
       प्रयोगशाला से "नीरव "जी निहार रहे थे या प्रकृति ही  उतर 
       आयी थी  और वाध्य कर रही थी उनकी लेखनी को ! सच तो 
       सच ही जाने ! साहित्य दोनों का आभारी है !............योगी 
               

      कर भलाई भूल जाना ये  जमीं से सीखिए
      फर्ज़ धरती ने निभाया फल रहा कोई और है.

         
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