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Sunday, December 5, 2010

कश्मीर को स्वायत्तता

-जयलोकमंगल के साथियों के लिए एक विचारोत्तेजक लेख प्रस्तुत कर रहा हूं। जिससे आप को कश्मीर के संदर्भ में कुछ समय सापेक्ष जानकारी मिल सकेगी।
हीरालाल पांडे
लेखकः सुरेश चिपलूनकर

प्रधानमंत्री जी ने कश्मीर मुद्दे पर सभी दलों की जो बैठक बुलाई थी, उसमें
उन्होंने एक बड़ी गम्भीर और व्यापक बहस छेड़ने वाली बात कह दी कि “यदि सभी दलचाहें तो कश्मीर को स्वायत्तता दी जा सकती है…”, लेकिन आश्चर्य की बात है कि
भाजपा को छोड़कर किसी भी दल ने इस बयान पर आपत्ति दर्ज करना तो दूर स्पष्टीकरणमाँगना भी उचित नहीं समझा। *प्रधानमंत्री **द्वारा **ऑफ़र **की **गई “**
स्वायत्तता” **का **क्या **मतलब **है? **क्या **प्रधानमंत्री **या **कांग्रेस *
*खुद **भी **इस **बारे **में **स्पष्ट **है?* या ऐसे ही हवा में कुछ बयान उछाल
दिया? कांग्रेस वाले स्वायत्तता किसे देंगे? उन लोगों को जो बरसों से भारतीय
टुकड़ों पर पल रहे हैं फ़िर भी अमरनाथ में यात्रियों की सुविधा के लिये अस्थाई
रुप से ज़मीन का एक टुकड़ा देने में उन्हें खतरा नज़र आने लगता है और विरोध में
सड़कों पर आ जाते हैं… या *स्वायत्तता **उन्हें **देंगे **जो **सरेआम **भारत **
का **तिरंगा **जला **रहे **हैं, 15 **अगस्त **को “**काला **दिवस” **मना **रहे *
*हैं?* किस स्वायत्तता की बात हो रही है मनमोहन जी, थोड़ा हमें भी तो बतायें।इतने गम्भीर मुद्दे पर राष्ट्रीय मीडिया, अखबारों और चैनलों की ठण्डीप्रतिक्रिया और शून्य कवरेज भी आश्चर्य पैदा करने वाला है। प्रधानमंत्री के इसबयान के बावजूद, मीडिया क्या दिखा रहा है? 1) शाहरुख खान ने
KKR<http://cricket.ndtv.com/storypage.aspx?id=SPOEN20100149367&nid=43535>
के लिये पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदा और पाकिस्तान के खिलाड़ियों का समर्थन
किया… 2) राहुल गाँधी की लोकप्रियता में भारी उछाल…, 3) पीपली लाइव की लॉंचिंग…
आदि-आदि-आदि। आप कहेंगे कि मीडिया तो बार-बार कश्मीर की
हिंसा<http://en.wikipedia.org/wiki/Insurgency_in_Jammu_and_Kashmir>
की खबरें दिखा रहा है… जी हाँ ज़रूर दिखा रहा है, लेकिन हेडलाइन, बाइलाइन, टिकर
और स्क्रीन में नीचे चलने वाले स्क्रोल में अधिकतर आपको “कश्मीर में गुस्सा…”,
“कश्मीर का युवा आक्रोशित…”, “कश्मीर में सुरक्षा बलों पर आक्रोशित युवाओं की
पत्थरबाजी…” जैसी खबरें दिखाई देंगी। सवाल उठता है कि *क्या **मीडिया **और **
चैनलों **में **राष्ट्रबोध **नाम **की **चीज़ **एकदम **खत्म **हो **गई **है? **
या **ये **किसी **के **इशारे **पर **इस **प्रकार **की **हेडलाइनें **दिखाते **
है*कश्मीर में गुस्सा, आक्रोश? किस बात पर आक्रोश? और किस पर गुस्सा? भारत की
सरकार पर? लेकिन भारत सरकार (यानी प्रकारान्तर से करोड़ों टैक्स भरने वाले) तो
इन कश्मीरियों को 60 साल से पाल-पोस रहे हैं, फ़िर किस बात का आक्रोश? भारत की
सरकार के कई कानून वहाँ चलते नहीं, कुछ को वे मानते नहीं, उनका झण्डा अलग है,
उनका संविधान अलग है, भारत का नागरिक वहाँ ज़मीन खरीद नहीं सकता, धारा 370 के
तहत विशेषाधिकार <http://www.jammu-kashmir.com/documents/jk_art370.html> मिला
हुआ है, हिन्दुओं (कश्मीरी पण्डितों) को बाकायदा “धार्मिक सफ़ाये” के तहत
कश्मीर से बाहर किया जा चुका है… फ़िर किस बात का गुस्सा है भई? *कहीं **यह **
हरामखोरी **की **चर्बी **तो **नहीं?* लगता तो यही है। वरना क्या कारण है कि14-15
साल के लड़के से लेकर यासीन
मलिक<http://thekashmir.wordpress.com/2006/11/30/yasin-malik-a-killer-who-has-gone-unpunished/>,
गिलानी <http://en.wikipedia.org/wiki/Syed_Ali_Shah_Geelani> और अब्दुल गनी
लोन जैसे बुज़ुर्ग भी भारत सरकार से, जब देखो तब खफ़ा रहते हैं।

जबकि दूसरी तरफ़ देखें तो भारत के नागरिक, हिन्दू संगठन, तमाम टैक्स देने वाले
और भारत को अखण्ड देखने की चाह रखने वाले देशप्रेमी… जिनको असल में गुस्सा आना
चाहिये, आक्रोशित होना चाहिये, नाराज़ी जताना चाहिये… वे नपुंसक की तरह चुपचाप
बैठे हैं और “स्वायत्तता” का राग सुन रहे हैं? *कोई **भी **उठकर **ये **सवाल **
नहीं **करता **कि **कश्मीर **के **पत्थरबाजों **को **पालने, **यासीन **मलिक **
जैसे **देशद्रोहियों **को **दिल्ली **लाकर **पाँच **सितारा **होटलों **में **
रुकवाने **और **भाषण **करवाने **के **लिये **हम **टैक्स **क्यों **दें? **किसी
**राजदीप **या **बरखा **दत्त **ने **कभी **किसी **कश्मीरी **पण्डित **का **
इंटरव्यू **लिया **कि **उसमें **कितना **आक्रोश **है?* लाखों हिन्दू लूटे गये,
बलात्कार किये गये, उनके मन्दिर तोड़े गये, क्योंकि गिलानी के पाकिस्तानी आका
ऐसा चाहते थे, तो जिन्हें गुस्सा आया होगा कभी उन्हें किसी चैनल पर दिखाया?
नहीं दिखाया, क्यों? क्या आक्रोशित होने और गुस्सा होने का हक सिर्फ़ कश्मीर के
हुल्लड़बाजों को ही है, राष्ट्रवादियों को नहीं?लेकिन *जैसे **ही “**राष्ट्रवाद” **की **बात **की **जाती **है, **मीडिया **को **हुड़हुड़ी **का **बुखार **आ **जाता **है, **राष्ट्रवाद **की **बात **करना, **
हिन्दू **हितों **की **बात **करना **तो **मानो **वर्जित **ही **है…* किसी टीवी
एंकर की औकात नहीं है कि वह कश्मीरी पण्डितों की दुर्गति और नारकीयपरिस्थितियों पर कोई कार्यक्रम बनाये और उसे हेडलाइन बनाकर जोर-शोर से प्रचारितकर सके, कोई चैनल देश को यह नहीं बताता कि आज तक कश्मीर के लिये भारत सरकार नेकितना-कुछ किया है, क्योंकि उनके मालिकों को “पोलिटिकली करेक्ट” रहना है,उन्हें कांग्रेस को नाराज़ नहीं करना है… स्वाभाविक सी बात है कि तब जनता
पूछेगी कि इतना पैसा खर्च करने के बावजूद कश्मीर में बेरोज़गारी क्यों है?पिछले 60 साल से कश्मीर में किसकी हुकूमत चल रही थी? दिल्ली में बैठे सूरमा,खरबों रुपये खर्च करने बावजूद कश्मीर में शान्ति क्यों नहीं ला सके? ऐसेअसुविधाजनक सवालों से “सेकुलरिज़्म” बचना चाहता है, इसलिये हमें समझाया जा रहा
है कि “कश्मीरी युवाओं में आक्रोश और गुस्सा” है।इधर अपने देश में गद्दार किस्म का मीडिया है, प्रस्तुत चित्र में देखिये “नवभारत टाइम्स अखबार” फ़ोटो के कैप्शन में लिखता है “कश्मीरी मुसलमान महिला” और“
भारतीय पुलिसवाला”, क्या मतलब है इसका? क्या नवभारत टाइम्स इशारा करना चाहता है
कि कश्मीर भारत से अलग हो चुका है और भारतीय पुलिस(?) कश्मीरी मुस्लिमों परअत्याचार कर रही है? यही तो पाकिस्तानी और अलगाववादी कश्मीरी भी कहते हैं… *मजे**की **बात **तो **यह **कि **यही **मीडिया **संस्थान “**अमन **की **आशा” **टाइप**के **आलतू-**फ़ालतू **कार्यक्रम **भी **आयोजित **कर **लेते **हैं।* जबकि उधरपाकिस्तान में उच्च स्तर पर सभी के सभी लोग कश्मीर को भारत से अलग करने में जी-जान से जुटे हैं, इसका सबूत यह है कि हाल ही में जब संयुक्त राष्ट्र के महासचिव
बान किं मून ने कश्मीर<http://news.oneindia.in/2010/08/04/ban-ki-moon-did-not-make-kashmir-remarks.html>के सन्दर्भ में अपना विवादास्पद बयान पढ़ा था (बाद में उन्होंने कहा कि यह उनका
मूल बयान नहीं है)… असल में बान के बयान का मजमून बदलने वाला व्यक्ति संयुक्त
राष्ट्र में पाकिस्तान का प्रवक्ता फ़रहान हक है, जिसने मूल बयान में हेराफ़ेरी
करके उसमें “कश्मीर” जोड़ दिया। फ़रहान हक ने तो अपने देश के प्रति देशभक्ति
दिखाई, लेकिन भारत के तथाकथित सेकुलरिज़्म के पैरोकार क्यों अपना मुँह सिले
बैठे रहते हैं?
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