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Sunday, December 19, 2010


यह तो मेरा सौभाग्य था कि देश की स्वतंत्रता के लिये अपने प्राणों की भारत माता के गीत गाते हुए आहुत देने वाले क्रान्तिकारी पंडित बिस्मिल को श्रद्धांजलि अर्पित करने का कार्यक्रम मेरे अकिंचन घर में सम्पन्न हुआ।
गोष्थी के अध्यक्ष पंडित सुरेश नीरव ने बिस्मिल जी का संक्षिप्त परिचय दिया। ज्ञात हुआ कि बिस्मिल जी के व्यक्तित्व तथा त्याग से प्रभावित होकर वहां के एक रक्षक ने उनसे विनती की कि व चाहें तो जेल से भाग सकते हैं, और वह उसके परिणाम को भोगने के लिये सहर्ष तैयार है। बिस्मिल ने जो उत्तर दिया वह चमत्कृत करने वाला है। उऩ्होंने उस देशप्रेम के सुझाव को अस्वीकार करते हुए कहा कि उनके बलिदान से देश की सेवा और स्वतंत्रता के लिये जागृति कहीं अधिक होगी। अत: वे बलिदान ही देना श्रेस्कर समझते हैं।
पथिक जी कविता ने भावभीनी काव्य श्रद्धान्जलि से कार्य का समारम्भ किया' पढ़ा जाe॥ वरन मैण् पथिक जी से अनुरोध करता हूं कि वे उसे ब्लाग पर डाल दें।
श्री गजेसिंह त्यागी जी ने पूज्य महावीर त्यागी से संबन्धित अज्ञात और अनोखे संस्मरण सुनाए। मेरा अनुरोध है कि वे भी इस ब्लाग को गर्वोन्नत न्नत करें।
श्री पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने एक गीत से और मुख्य अतिथि श्री बी एल गौड़ ने अपनी कविताओं से संध्या का आनंद बढ़ाया।
श्री राज मणि ने पहले तो राष्ट्रीय अभिलेखागार के विषय में‌बहुत उपयोगी‌ जानकारी दी और् कहा कि अब कोई भी नागरिक उस ग्रंथागार का लाभ उठा सकता है। और बाद में उऩ्होंने अपने घाव करें गम्भीर के से दोहों से सभा को मुग्ध किया।
मैने भी एक लम्बी कविता सुनाई ( जो शायद उस सभा के लिये अधिक लम्बी थी), उस पर टिप्पणी तो अन्य कविगण ही करें तो अच्छा।
अंत में अध्यक्ष पंडित सुरेश नीरव जो समा बांधा उसके पुनर्निर्माण के लिये मेरा उनसे अनुरोध है कि वे भी उन कविताओं, आध्यात्मिक गज़लों आदि को ब्लाग पर डालें।
श्री‌बी एल गौड़ गोष्ठी से इतने प्रभावित हुए कि उऩ्होंने अपने निवास पर एक गोष्ठी के आयोजन के लिये लिये हम सभी को आमंत्रण दिया, हम सब ने उसे सधन्यवाद स्वीकार किया। यहां तक कि श्री पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने तो कहा कि प्रत्येक माह ऐसी गोष्ठी‌होना चाहिये।
गोष्ठी‌में‌पधारने वाले सभी देश प्रेमी कवियों को मेरा धन्यवाद। मैं इन सभी‌महान कवियों का यथोचित आदर नहीं कर पाया, इसका मुझे खेद है।
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