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Wednesday, January 19, 2011

क्रमश ...................

      मात्र निंदा करने से लेखनी का दायित्व संपन्न नहीं हो जाता  !माना प्रश्न आवश्यक हें लेकिन समाधान भी नितांत आवश्यक हैं ! सच तो ये है कि जब प्रश्न व्यवस्था न करके स्वयंम से किये जाते हैं तो समाधान का कुछ रास्ता अवश्य बनता है , क्यों कि हम भी व्यवस्था का हिस्सा हैं !गहरे अर्थों में देखें तो कहीं न कहीं हम भी जिम्मेवार हैं समस्याओं  के !फिर प्रश्न किससे  ? निंदा किसकी ?.........लेकिन कुछ  कलमों को निंदा में रस आता है ! निंदा में व्यक्ति स्वयं  को सुरक्षित महसूस करता है , समाधान बिल्ली के गले में घंटी बाँधने जैसा है !
           मुल्ला नसरुद्दीन से पडोसी न पूछा -" मुल्ला तुम्हे किस बात के लिए पुरूस्कार मिला था ?
           " मैंने कुछ प्रश्न उठाये थे व्यवस्था के खिलाफ  " मुल्ला ने कहा 
           " लेकिन सरकार ने पुरूस्कार वापस क्यों ले लिया ? पडोसी ने पुनः प्रश्न किया 
           " मैंने कुछ समाधान सुझाए थे "  मुल्ला ने जबाब दिया
    अमेरिका या पकिस्तान का हाथ ,  ये नेताओं को बोलने दो  ! लेकिन ये सच है कि मनुष्यता के पतन में केवल मनुष्य का हाथ है, किसी विपक्षी पार्टी का नहीं !
              आदरणीय तिवारी जी प्रज्ञावान पुरुष हैं ! अच्छा इशारा किया है एक लाइन में मेरे प्रश्न  'समाधान 'का ! भक्ति मार्ग, ज्ञान मार्ग , योग मार्ग , निष्काम कर्म योग मार्ग आदि आदि !बाकी में भोग वाद कि निंदा है !
            भोगवाद विज्ञान का वरदान है  !कब तक बैलगाड़ी कि सवारी करते रहेंगे ? ये भी भोगवाद ही है कि आज हम कुछ बुद्धिजीवी  ( मेरे अलावा ) रोज-मर्रा  की काश-म-काश को जीते हुए एक मंच पर हैं ! कबूतरों को पैगाम थमाते तो एक उम्र लग जाती  ! कोई भी तकनीक दोषी नहीं , यह व्यक्ति विशेष की सोच पर निर्भर करता है कि वह इंटरनेट पर क्या देखना चाहता है ! यह आदमी की सोच है कि वह परमाणु से परमाण्विक विद्युत् केंद्र बनाता है या परमाणु बम  !............परमाणु निर्दोष है ! ................मैं खुश -नसीब हूँ कि एक ऐसे व्यक्तित्व के साथ विचारों के आदान -प्रदान में हूँ जिन्होंने बड़ी बन्दूक भी सम्हाली है और कलम भी ! मेरे प्रणाम स्वीकारें !..........योगी

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