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Monday, February 28, 2011

नित्यानंद तुषार की ग़ज़ल

ग़ज़ल-
मुहब्बत की कहानी में सदा ये ही हुआ होगा
ख़ुशी, सपने, तड़प , आँसू, ग़मों क़ा सिलसिला होगा

किसी की आँख में आँसू ,किसी के होंठ पर सरगम
किसी क़ा दिल जला होगा किसी क़ा घर बसा होगा

युगों से हम भटकते हैं तुम्हारे वास्ते देखो
तुम्हारा नाम दिल पर तो ख़ुदा ने ही लिखा होगा

तुम्हें शायद कभी इस बात क़ा एहसास भी होगा
कि मर -मर कर यहाँ पर भी कभी कोई जिया होगा

`तुषार` उसकी मुहब्बत क़ा करिश्मा है यक़ीनन ये
न हो पाया जो उसका ,वो , उसी क़ा हो गया होगा - -
-नित्यानंद `तुषार`
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