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Monday, February 14, 2011

सूरजकुंड में कविता महोत्सव

रपट-
कवि सम्मेलन संपन्न
विगत दिनों पाँच सितारा होटल दी क्लेरेजिस ,सूरजकुंड ,दिल्ली ,एन सी आर में एक भव्य कवि सम्मेलन क़ा आयोजन किया गया
कवि सम्मेलन 2 घंटे की अवधि के लिये नियत था परन्तु श्रोताओं के जमे रहने के कारण 3 घंटे तक चला
कवि सम्मेलन प्रारंभ होने से पूर्व इंडियन पैंट्स असोशियेशन की ओर से श्री पी. के खन्ना द्वारा सभी आमंत्रित कवियों क़ा शानदार बुके भेंट कर स्वागत किया गया
भव्य सभागार में कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कवि डॉ कुअंर बेचैन को सोंपी गई .अध्यक्ष की अनुमति से कवि सम्मेलन प्रारंभ किया गया
कवि सम्मेलन में सरस्वती वंदना के पश्चात् संचालक द्वारा गाजियाबाद से पधारे युवा ग़ज़लकार नित्यानंद `तुषार को आमंत्रित किया गया
नित्यानंद`तुषार` की पंक्तियाँ श्रोताओं द्वारा तालियों की गडगडाहट के साथ ह्रदयंगम की गईं ,नित्यानंद ` तुषार` ने अपनी कई ग़ज़लों और गीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया

मुश्किलों से भी निकलना सीखिए
जगमगाना है तो जलना सीखिए
जब फिसलने की तमन्ना हो जवाँ
उन दिनों में भी संभलना सीखिए -नित्यानंद `तुषार`

नित्यानंद `तुषार` के बाद कानपुर से पधारे गीतकार विनोद श्रीवास्तव जी ने अपने काव्य पाठ में अपने कुछ मुक्तक तथा एक गीत प्रस्तुत किया ,श्रोताओं ने उन्हें भी एकाग्र होकर सुना

धर्म छोटे बड़े नहीं होते
जानते तो लड़े नहीं होते - विनोद श्रीवास्तव
कानपुर से ही पधारे गीतकार वीरेन्द्र आस्तिक जी द्वारा अपने गीत प्रस्तुत किये गए,उनके गीत श्रोताओं द्वारा पसंद किये गए, खासतौर पर विदेश में रहने वाले युवक की मनोदशा वाला गीत
लोगों ने डूबकर सुना

खुशियाँ हैं ,जैसे मृग जल
....
पापा ने ईमेल किया है
मम्मी क़ा आँचल -वीरेन्द्र आस्तिक

अध्यक्षता की परंपरा तोड़ते हुए संचालक ने गाजियाबाद से पधारे कवि डॉ. कुंअर बेचैन को काव्य पाठ हेतु आमंत्रित किया ,कुंअर बेचैन जी ने अपने गीत और ग़ज़लों से श्रोताओं को आनंदित किया

ग़मों की आँच पे आँसू उबालकर देखो
बनेंगे रंग किसी पर भी डालकर देखो - कुंअर बेचैन

मणिपुर से पधारीं डॉ.कंचन शर्मा जो कि मुक्त छंद की अच्छी कविताएँ लिख रही हैं , उन्होंने अपनी कई छोटी कविताएँ प्रस्तुत कीं और श्रोताओं द्वारा उनकी पंक्तियाँ आत्मसात की गईं,और उन्हें मन से सुना गया

हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा भी मंच पर शोभित थे, श्रोता उन्हें भी सुनना चाहते थे ,संचालक ने उन्हें कविता पाठ हेतु आमंत्रित किया,सुरेन्द्र शर्मा जी ने कहा कि आप मेरे लिये तालियाँ बजा सकते हैं ,ये सुनते ही सभागार में तालियाँ और ठहाके गूंजने लगे ,उन्होंने हास्य रस की कई कविताएँ सुनाई ,पर बीच- बीच में मर्म स्पर्शी नैतिक ,प्रेरक और सामाजिक बातें भी कहीं ,उनकी एक कविता कांफिडेंस क़ा कुछ भाग , कुछ यूँ था ,लोग हँसते -हँसते लोट पोट हो गए

एक आदमी अपने लड़के को पीट रहा था ,
मैने पूछा कि इसे क्यों पीट रहे हो ,
उसने कहा कि कल इसका रिजल्ट आना है और आज मुझे बाहर जाना है -सुरेन्द्र शर्मा

इसके पश्चात् भोजन की व्यवस्था वहीँ पाँच सितारा होटल में ही की गई थी ,कवि सम्मेलन से पूर्व सभी आमंत्रित कवियों को इसी पाँच सितारा होटल में आराम करने हेतु प्रथक -प्रथक कमरे भी उपलब्ध करवाए गए थे ,इस प्रकार यह कवि सम्मेलन संपन्न हुआ और श्रोताओं तथा कवियों के लिये एक सुनहरी याद बन गया
प्रस्तुति-नित्यानंद `तुषार`
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