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Friday, February 4, 2011

संतों और प्रभु की कृपा बनी रहे.

 आदरणीय श्री प्रशांत योगीजी, 
आपकी बधाई के लिए मैं  हृदय से आपका आभारी हूं। आप-जैसे सि़द्ध पुरुषों की शुभकामनाओं का ही फल-सुफल है कि जीवन में यश और सम्मान मिल जाता है वरना आज के भ्रष्टाचारी दौर में कौन किसको पूछ रहा है। और हमारे-जैसे स्वाभिमानी आदमी के लिए तो यह सब और भी कठिन है। संतों और प्रभु की कृपा बनी रहे..
पंडित सुरेश नीरव

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