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Sunday, February 6, 2011

प्रणाम

आदरणीय परम पूज्य ब्रह्म ऋषि श्री नीरव जी,
प्रणाम व प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद,
मुझसे मेरा कुछ भी नहीं, जो कुछ है सो विधि साथ
आहत-क्षुब्ध, उन्मुक्त मन मेरा, चाहे शीश पर हाथ,
चरण वंदन,
प्रोफेसर अमित विकास हंस
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