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Wednesday, February 23, 2011

खुशामद गधों की जो करते रहेंगे

हास्य-ग़ज़ल-
फसल कामयाबी की चरते रहेंगे
खुशामद गधों की जो करते रहेंगे
मज़ा लूटने को मुहल्ले के मंगते
हवा तुझमें मिलजुल के भरते रहेंगे
कहीं केस में न फसादे दरोगा
जिन्हें प्यारी इज्जत वो डरते रहेंगे
न बदली सियासत ने तकदीर इनकी
कलाकार भूखे ही मरते रहेंगे
था बेहतर उसूलों की चर्चा न करते
अब आंखों से आंसू ही झरते रहेंगे
सभी बंदिशों की उड़ाकर के धज्जी
जो पीते हैं  पीकर वो मरते रहेंगे
हे कुर्सी पर काबिज़ मिनिस्टर ये जब तक
गलीचों पे चमचे पसरते रहेंगे
खड़े जो इलैक्शन में हो जाएं शायर
तो ना घाट के और न घर के रहेंगे
तिजारत जो करते हैं पिंजरों की नीरव
परिंदों के पर वो कतरते रहेंगे।
पंडित सुरेश नीरव




 

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