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Friday, March 4, 2011

ये सांझ मेरी असनाई में, कुछ यादें और सजा दे तू.....
वो दूर रहे चाहे जितना, मिलने की आस बधां दे तू....
दुख देख मेरे जग हंसता है.....
मेरे भी होंठ मचलते है.....
अंतर दोनों के हिलने में....
मुझको भी हंसना सिखला दे तू....
ये सांझ मेरी असनाई में,कुछ यादें और सजा दे तू...
वो दूर रहे चाहे जितना, मिलने की आस बधां दे तू...
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