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Saturday, March 26, 2011

अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन का विराट कवि सम्मेलन


ग़ज़रौला में हुआ कवि सम्मेलन-
एटमी प्रदूषण के 
कातिलाना तेवर हैं,
पांव बूढ़ी पृथ्वी के 
अब तो डगमगाने हैं
विकृत होते पर्यावरण और पृथ्वी की पीड़ा से समाज को अवगत कराने के रचनात्मक उद्धेश्य से अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में 24 मार्च की सायं एक विराट कवि सम्मेलन उत्तर प्रदेश के ज्योतिबा फुले नगर गजरौला में आयोजित किया। समारोह का उदघाटन उ.प्र. सरकार के ग्रमीण एवं रोजगार मंत्री डॉ.यशवंत सिंह ने तथा सफल एवं सरस संचालन हिंदी के प्रख्यात कवि पं. सुरेश नीरव ने किया। मुख्य अतिथि थे इस क्षेत्र के सांसद देवेन्द्र नागपाल। इस अवसर पर सुरेश नीरव की प्रश्नोत्तर शैली में दार्शनिक विषयवस्तु पर लिखी गई सद्यः प्रकाशित पुस्तक उत्तर प्रश्नोपनिषद का लोकार्पण भी हुआ और उन्हें शॉल-श्रीफल से सम्मानित भी किया गया। इस कविसम्मेलन में डॉ.कुंअर बेचैन (गाजियाबाद),वसीम वरेलवी, (बरेली),सोम ठाकुर(आगरा), हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा( दिल्ली), अली हसन मकरैंडिया (विद्युत नगर),अरविंदपथिक(शाहजहांपुर),
डॉ. राहुल अवस्थी(बरेली) अजहर इकबाल (मेरठ),डॉ मधु चतुर्वेदी (गजरौला) पंडित सुरेश नीरव(दिल्ली) और रजनीकांत राजू (गाजियाबाद) सहित कुल बीस कवियों ने रचना पाठ किया। और जापान में सुनामी के कहर से काल-कवलित हुए लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपस्थित लोगों सहित दो मिनट का मौन भी रखा। कवि सुरेश नीरव ने- एटमी प्रदूषण के कातिलाना तेवर हैं,पांव बूढ़ी पृथ्वी के अब तो डगमगाने हैं, अपनी मार्मिक रचना पढ़कर लोगों को पृथ्वी की पीड़ा से अवगत कराया और पर्यावरण-संरक्षण की जरूरत को जोरदारी से रेखांकित किया। सम्मेलन सरस वातावरण में पूरे चार घंटे तक चलता रहा। इस वर्ष के डॉ रामगोपाल चतुर्वेदी सम्मान से कुछ प्रतिष्ठित विभूतियों को इस मौके पर सम्मानित भी किया गया। सम्मेलन के अध्यक्ष सतीश चतुर्वेदी भोपाल से इस आयोजन में शरीक होने आए थे।
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