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Thursday, March 10, 2011

जो नींद में डूबे हैं , उनको ही जगाना है।

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इक आग है सीने में ,तस्वीर बदलने की
तुम साथ ज़रा दे दो , ये मुल्क़ सजाना है

शोहरत के लिये यारों ,हम शे`र नहीं कहते
जो नींद में डूबे हैं , उनको ही जगाना है।
-नित्यानंद तुषार
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