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Sunday, April 3, 2011

"अरे साहब, दुनिया बड़ी खराब है |"

"अरे साहब, दुनिया बड़ी खराब है |" ये जुमला हर आदमी की ज़ुबान पर आम है | लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि दुनिया खराब है कहाँ ? दरअसल हम सब के अन्दर दो इंसान बैठे हुए हैं | एक अच्छा और एक बुरा | जैसी परिस्थिति होती है उससे निपटने के लिए हम अपने के अन्दर के उसी इंसान को आगे कर देते हैं | हमें लगता है कि अच्छा वाला इंसान बड़ा सीधा सादा और भोला है, स्थितियों विशेषकर जटिल स्थितियों को HANDLE करने में वो अकसर चूक करता है | उसकी DEALING बड़ी साफ़ सुथरी और STRAIT FORWARD है, जो प्रायः फायदे का सौदा नहीं होती | इसलिए हम आगे तो इसी इंसान को रखते हैं लेकिन पीछे से सारी DEALING बुरा वाला इंसान करता है | और धीरे धीरे हमें इसकी आदत पड़ जाती है | जहां हमें सामने वाले व्यक्ति के बुरे इंसान से पराजय मिलती है, वहीं हमारा ये बुरा इंसान, अच्छे इंसान को आगे कर के कहने लगता है "अरे साहब, दुनिया बड़ी खराब है |"
सुरेश ठाकुर
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