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Sunday, April 17, 2011

तुक बंदी आती नहीं , कविता से है दूर,

दोहे

कैसा उल्टा वक़्त है , कैसा उल्टा दौर,
जो चोरी में लिप्त है, बनता है सिरमौर,

तुक बंदी आती नहीं , कविता से है दूर,
चमचे चमची कह रहे उसको ही मशहूर,

नालायक को धन मिला , हो बैठा मगरुर,
जेल जायेगा एक दिन, मद होगा काफूर,

मेरी ग़ज़लों से करी, चोरी भी भरपूर,
कवियों में इज्ज़त नहीं ,प्रायोजित हैं टूर,

सब तथ्यों के साथ में, खोली उसकी पोल,
बोल रहा जो आज भी बड़े -बड़े कुछ बोल,

चमचे -चमची कर रहे अब उसका जयघोष ,
जिसको लेकर है बहुत ,काव्य जगत में रोष ,

धीरे - धीरे उठ रहा , जनता का विश्वास,
सुरा सुंदरी चाहिए , करता है बकवास ,

बेशर्मी की इंतिहा , उसने कर दी यार,
कविताओं के साथ वो, करता है व्यभिचार,

सीधे सादे बालकों को बहकाए चोर,
लिखना भी आता नहीं , तुक में भी कमज़ोर,

पुजता था जो कल तलक , अब है वो बदनाम,
उसकी चोरी ने किया, उसका ये अंजाम - -
नित्यानंद `तुषार`
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