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Saturday, May 14, 2011

सौ करोड जनता भारत कीदे ज़बाव

लोकमंगलपर योंतो चहलपहल है विशेष विपिन चतुर्वेदीजी के गीतों की ।अफज़लको फांसी ना दिये जाने के कारणजोभाव मन मे उठे वे ही प्रस्तुत कर रहा हूं।कविताका दावा नही है फिर भी आपकी राय मेरे लिए अर्थवान है।
आज स्वर्ग मे तडपे होंगे फिर शेखर ,
अशफाक झुकाये शीश मौन बैठे होंगे
बिस्मिल जी ने क्या क्या न आज सोचा होगा?
लहरी,रोशनने कैसे-कैसे सवाल पूंछे होंगे?
क्यों चूमा फांसी का फंदा हमने
असैंबली मे बम नाहक ही फोडे थे
गुस्से में मुठ्ठियां भींच कह रहे,भगत
ऐसी आज़ादीके लिए प्राणना छोडे थे,
संसद पर हमला करने वालों को
फांसी देने मे इतनी घबराहट क्यों?
क्योंराजनीतिके गलियारे हैं डरे हुए
घाटी मे बिला वजहइतनी चिल्लाहट क्यों?
क्या चंद वेश्याजंतर -मंतर पर
चीख पुकार मचा कर धमका जायेंगी
क्या ओछी-राजनीति के हाथोंअपमानित हो
रूहें अमर शहीदोंकीफिर अश्रु बहायंगी
संसद की खातिर प्राण गवाने वालों ने
हतप्रभ हो जब धरती पर झांका होगा
सोचा होगा बेकार ही प्राणगंवाये थे
हमभावुक थे ,मन कच्चा था
जैसे पाखंडी ,मक्कार आज हैकर्णधार
उनसे तोअंग्रेजी राज़हीअच्छा था
जहांअफजलोंको बिरियानी मिलती हो
शेखर ,बिस्मिल की मां भूखी ही सो जाये
उस देस कीसंसद पर एटमबमबरसे
कल होनी हो जो प्रलय आजही होजाये
क्या भारत की धरती पौरूष हीन हुई
क्या भारतसिर्फ अफज़लोंका मक्कारोंका
सौ करोड जनता भारत कीदे ज़बाव
क्या भारतसिर्फ कमीनों का मक्कारों का?
ये धरतीराणा शिवा ,भगत की धरती है
इस धरती ने अब्दुलहमीदउपजाये हैं
इस धरतीनेदेखे हैंकईमहाभारत
-इस धरती पर भगवानमनुज बन आये हैं
कैसे मानूं,इस धरतीपर साहस शौर्य नहीं
मुफ्ती ,गुलाम,फारूखोकाही बसेरा है
भारत का सौभाग्य सूर्यहो चुका अस्त
इसकीकिस्मतमें छाया घोर अंधेरा है
नहींकिसी भी तर ह नहींमैं मानूंगा
भारत की धरती साहस शौर्य से हीननही
भारतमाता लाचार सिसकती रहे,ठगे से देखें हम
हमइतने नालायककायर ,और कमीननहीं
फांसीपर लटकेंगे अफज़ल,पर पहले
चौराहोंपर लटकायेंगे फारूखों को,
जूते मारेंगे मुफ्ती के और गुलामोंके
गलियों-गलियों में भूनेंगे गद्दारों को
कवि नहींसौ करोड भारत की जनता कहती है
गद्दार एक भी बचकर ना जा पायेगा
भारत मे रहने चाहत रखने वालों
वंदेमातरम आज तुम्हेंगाना होगा
अरविंद पथिक
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