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Friday, May 27, 2011

जब भी गले मिलते हैं खंजर भोंक देता है,

जब भी गले मिलते हैं खंजर भोंक देता है,
लाहौर वाली बस को करगिल रोक देता है,
हम भाई समझते हैं, तू दुश्मन समझता है
हमारी नेकनीयती को तू उलझन समझता है,
अगर लडने की हसरत है तो लड ले सामनेआकर
कुछ ना पा सकेगा पीठ पर यो जोर आजमाकर
तेरे पाले हुए कुत्ते ,ये अलकायदा-लश्कर
पागल हो चुके हैं अब झिझोडेंगे तुझे कसकर
पापोंका घडा तेरे यकायक फूट जायेगा
हमारे देखते ही देखते तू टूट जायेगा------
अरविंद पथिक
९९१०४१६४९६
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