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Friday, June 3, 2011

शेर और कुत्ता

नीति कथा-
एक शेर आराम कर रहा था तभी एक कुत्ता वहा आया और उसे अनाप शनाप गालिया देने लगा शेर को गुस्सा आ गाया और उसे मारने दौड़ा कुत्ता भागकर दीवार में बने छोटे से छेद से निकल गया और शेर का मुह उसमें फ्स गया और कुत्ता घूम कर आया और शेर कि पीठ पर बैठकर सवारी करने लगा बड़ी मुश्किल से शेर ने अपना मुँह निकाला और बैठ गया/ कुत्ता फिर थोड़ी देर बाद आया और फिर उसे गालिया निकालने लगा शेर फिर उसके पीछे भगा और कुत्ता फिर दीवार में बने हुइये छेद से बाहर और शेर का मुँह फिर फँस गया कुत्ता फिर घूम के आया और उसकी पीठ पर सवारी करने लगा/ शेर थक कर बैठ गया/ तभी शेरनी व्हा आई तो कुत्ते ने उसे भी भला बुरा कहा शेरनी बोली यह इतना बोले जा रहा है आप चुप बैठे है/ शेर बोला उसे बोलने दे कुत्ता है भोकेगा ही शेरनी नही मानी और उसे मार्ने dodi और कुत्ता फिर छेद से बाहर और अब शेरनी फँस गई और कुत्ता फ्रिर शेरनी के ऊपर सवारी करने लगा. शेरनी भी थक कर बैठ गई/ शेर ने बोला माना किया था ना कुत्ते के मुह मत लग पद गई ना ठंडक।
मनोज शर्मा
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