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Monday, July 4, 2011

शाकाहार पर कुछ दोहे

-शाकाहार-शाकाहार-शाकाहार-शाकाहार
(१)
बंद करो ये लहूधार का , जीवन का व्यापार
मूक पशू की पीड़ा समझो,अपनाओ शाकाहार

शाकाहार(२)
अरे मनुज ने मानवता तज , पशुता का यह मार्ग चुना
नीच कर्म यह महापाप है , सब पापों से कई गुना

शाकाहार(३)
दर दर भटके शांति खोजता , मानवता के नारों में

उलझा तीन टके के पीछे , पशू बध के व्यापारों में

शाकाहार(४)
कहाँ शुकून मिलेगा हमको,जब हर घर में चित्कार है
लाल लहू से जीभ रंगी है , अरु हाथों में तलवार है

शाकाहार(५)
चोट यदि मुन्ने को लगती , तब कितनी पीड़ा होती है
क्यों कोई फर्क नहीं पड़ता,जब बकरे की अम्मा रोती है

शाकाहार(६)
कई माओं की छिपी व्यथा है,तेरी षटरस थाली में
कई बधों की लिखी कथा , तेरे होटों की लाली में

शाकाहार (७)
मंदिर में पूजे गोमाता , कब घर में आदर पाती है
दूध पिलाना बंद करे तो , गाय कतल की जाती है

शाकाहार(८)
आज यदि पशू रोता है तो , कल तेरी भी बारी है
इन तलबारों की धारों की , नहीं किसी से यारी है

शाकाहार(९)
अरे पशू की छोड़ो चिंता , अब अपनी ही बात करो
रहे नहीं जो यदी काम के ,वे बोलेंगे अपघात करो

(10)
कहो कहाँ दरकार रही , अब बाहर के शत्रु की
गर्भपात कर करते ह्त्या,खुद अपने शिशुओं की

शाकाहार(11)
मेरी तेरी हो या पशुओं की , अरे जान तो जान है
इसमें उसमें जो फर्क करे,वह कायर है,बेईमान है

शाकाहार(12)
मांसाहार का दूषण लोगों,नहीं दूर क्षितिज का रहा अन्धेरा
आज द्वार पर दस्तक देता , जाने कब कर लेगा डेरा

शाकाहार(13)
अरे अश्रु की धाराओं ने , अपने आशय खो डाले
अरे लहू के लाल रंगों से , खेलें बालक भोले भाले

शाकाहार(14)
उनके जीवन में कहाँ दया , क्या प्रेम भावना रह पायेगी
खुद ही आपको लुटा पाओगे , जब बाढ़ खेत को खायेगी

शाकाहार(15)
करे शूल का बीजारोपण , उगता पेड़ बबूल का
अनंत काल भुगतोगे दूषण,एक समय की भूल का

शाकाहार(16)
इससे पहिले की लुट जाएँ,जाग्रत हो जाना चाहिए
हम भी रहें शाकाहारी , औरों को बनाना चाहिए


शाकाहार (१७)
अब नेक दयालू युवकों ने , छेड़ा दिया अभियान
अरे निरीह पशुओं के प्रति अब,करलो युद्धविराम


शाकाहार (18)
तुम खुद भी हो जीव , जीवका रक्खो तो सम्मान
नहीं बनो कातिल हत्यारे , तुम तो हो भगवान्


शाकाहार (19)
अरे! एक जीवन की खातिर , कितने जीवन छीनोगे
अपनी उनकी एक जात है , कब इस सच को चीन्होगे ।
परमात्म प्रकाश भरिल्ल
-parmatm prakash bharill
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