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Tuesday, July 12, 2011

ज प्रेम की परिभाषा जान लूँ,
आज से ही मैं उसे भगवान अपना मान लूँ !
वो मेरे जीवन का है आधार भी,
अपना जीवन भी में उसका मान लूं !!
स्वप्न देखता हूँ खुली आँखों से उसके,
आज स्वप्न में करीब से उसे पहचान लूँ !!!
विलम्ब न हो जाये कुछ कहने में,
मैं उसी से मांग के उसका कोई एहसान लूँ !!!!
प्रेम में अमरत्व है छुपा कहीं,
मैं उसी अमरत्व का वरदान लूँ !!!!!
आज प्रेम की परिभाषा जान लूँ,
आज से ही मैं उसे भगवान अपना मान लूँ !

*मेरे 'निर्मल' प्रेम को समर्पित *
 "अरविन्द कुमार पंकज"
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