There was an error in this gadget

Search This Blog

Tuesday, July 12, 2011

पहली बार तुम तब जिये थे

पहली बार तुम तब जिये थे
जबकि तुम घोषित अघोषित वर्जनाओ से भिडे थे
जब सुरक्षा और असुरक्षा के बीच तुमने
असुरक्षा चुनी थी
जब तुमने सूरज को आन्ख दिखाई थी
तेज़ धूप मे जब तुम छत पर दौडे थे
और पसीने की खुश्बू को चक्खा था
जब तुमने बारिश मे छाता फ़ेन्का था
जब तुमने बादल मे शक्ले खोजी थी

तुम्हारी ज़िन्दगी का सबसे ज़िन्दा क्षण तब आया था
जब तुमने सारी मर्यादाये लान्घी थी
जब तुमने परम्पराओ को अन्गूठा दिखाया था
.........श्रीकान्त
Post a Comment