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Monday, September 26, 2011

बत्तीसी से खा बत्तीस रुपए का खाना








हास्य-व्यंग्य-
सर्वेंट क्वार्टर जित्ता बड़ा दिल
 
पंडित सुरेश नीरव
मध्यप्रदेश ग्वालियर में जन्मे बहुमुखी रचनाकार पंडित सुरेश नीरव की गीत-गजल,हास्य-व्यंग्य और मुक्त छंद विभिन्न विधाओं में सोलह पुस्तकें प्रकाशित हैं। अंग्रेजी,फ्रेंच,उर्दू में अनूदित कवि ने छब्बीस से अधिक देशों में हिंदी कविता का प्रतिनिधित्व किया है। हिंदुस्तान टाइम्स प्रकाशन समूह की मासिक पत्रिका कादम्बिनी के संपादन मंडल से तीस वर्षों तक संबद्ध और सात टीवी सीरियल लिखनेवाले सृजनकार को भारत के दो राष्ट्रपतियों और नेपाल की धर्म संसद के अलावा इजिप्त दूतावास में सम्मानित किया जा चुका है। भारत के प्रधानमंत्री द्वारा आपको मीडिया इंटरनेशनल एवार्ड से भी नवाजा गया है। दूरदर्शन के साहित्यिक कार्यक्रमों के लोकप्रिय संचालक श्री सुरेश नीरव आजकल देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन के राष्ट्रीय महासचिव हैं। समय सापेक्ष हूं मैं,जहान है मुझमें, मज़ा मिलेनियम,पोयट्री ऑफ सुरेश नीरव आपकी चर्चित पुस्तकें हैं। और चर्चित सीरियलों में कमाल है,प्रहरी,कंप्यूटरमैन तथा रंग-रंगीले-छैल-छबीले उल्लेखनीय हैं।
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जकल अखबार और खबरिया चैनल खबरों के कम मनोरंजन के केन्द्र ज्यादा बने हुए हैं। राजनेताओं के साफ-सुथरे और पारदर्शी फूहड़पन को जितनी चुस्ती-फुर्ती से ये लोग जन-गण-मन तक पहुंचाते हैं उसका हरेक पाठक को तहेदिल से ही नहीं तहे दिमाग से भी आभारी होना चाहिए। सरकार की संवेदनशीलता और आंकड़ों की योगसाधना से लैस हमारी जनतांत्रिक व्यवस्था अक्सर ऐसा मंजा हुआ मज़ाक करती रहती है कि भूखे पेटवाले को भी ऐसे मज़ाक याद करके हंसी आ जाती है। बल्कि जब कभी हमारे देश का आम आदमी दुखी होता है तो वह इन सरकारी लतीफों को याद कर-करके फूट-फूटकर हंस लेता है। पूरा बिग बॉस का घर है हमारी सरकार। जहां से चौबीस घंटे लॉफ्टर शो का लाइव टेलीकास्ट चलता रहता है। जोड-तोड़ के लिए प्रतिबद्ध,झूठ बोलने के लिए वचनबद्ध और नाना प्रकार को घोटालों से संबद्ध अपनी सरकार की अभद्र हेकड़ी पर देश की जनता को  आदमकद नाज़ है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की मॉडल है हमारी सरकार। जिसके ग्लोबल-गौरव प्रतिनिधि काग़ज़ी जमीन पर आंकड़ों के हवाई फायर करनेवाले तीस मारखा सूरमा हैं। इनके आंकड़ों के काले जादू का कहीं कोई काट नहीं। सरकार के कलुषित, कुलित और कपटी अर्थशास्त्र के एक जघन्य दुर्दांत प्रवक्ता ने फतवा जारी किया है कि दिल्ली-मुंबई और चेन्नई-जैसे महानगरों में आदमी बत्तीस रुपए में रोज दो वक्त भरपेट खाना आराम से खा सकता है।  ये सरकारी अमृत वचन उस दौर में सरकार के श्रीमुख से निकल कर आए हैं जबकि पूरी दुनिया में आर्थिक सुधार की इज्जत का लुटा-पिटा दीवालिया जलूस तमाम देशों को कंगाली के पाताल में फेंकने पर आमादा है। मंहगाई अपने फटे हुए ब्लाउज में मुद्रास्फीति के थिगले लगाए मंदी के हरकारों की चतुर चौकड़ी को चकमा देकर आशंकाओं के सूचकांक की चौहद्दी सीमाएं तोड़कर विकास की गुल्लक चुराकर फरार होने की जुगत भिड़ा रही है। उस मनोहारी मंगल वेला में सत्ता ने अपनी बेशर्म बत्तीसी दिखाकर बत्तीस रुपए में भरपेट खाना खाने के सफेद झूठ पर अपबनी काली सरकारी मोहर लगाई है। सरकार की इस क्रूर संवेदनशीलता पर सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा की हम होंगे कामयाब मार्का जनता छुब्ध-मुग्ध है। जनता को ललकारनेवाली हर समस्या से दो-दो हाथ करने को लंगोट कसी तैयार जनहितकारी व्यवस्था की सरकारी दबंगई पर हाय कुर्बान जाऊं। सिंहासन बत्तीसी पर बैठी सरकार की बेशर्म बत्तीसी से निकली बत्तीस रुपए की अकूत संपत्ति की महाविलासी घोषणा ने अच्छे-अच्छों की बत्ती गुल कर दी है।  ऐसी हाहाकारी खबरें आ रही हैं कि कुछ उत्साही जनों ने खुशी के इस स्याह मौसम में योजना आयोगवाले सरदारजी-मंटोक सिंह आलूवालिया को बत्तीस-बत्तीस रुपए के तमाम चैक न्यौछावर कर डाले। इसे कहते हैं घर बैठे लक्ष्मी का आना। चैकों की गड़डी हाथ में लिए आहूं-आहूं करते हुए सरदारजी भांगड़ा करने लगे। वैसे उनको तो इन बत्तीस रुपयों की भी क्या जरूरत। गुरू की कृपा से लंगर में खाना खाने का नेशनल परमिट उन्हें प्राप्त है। फिर बत्तीस रुपए-जैसी बड़ी धनराशि की वे फिजूलखर्ची क्यों करेंगे। यारो मंहगाई का बिल नहीं दुआ देनेवाले का दिल भी तो देखो। कित्ता बड़ा है। सरकारी सर्वेंट क्वार्टर जित्ता बड़ा दिल।
आई-204,गोविंद पुरम,ग़ज़ियाबाद,201013
मोबाइल-09810243966
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