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Friday, September 9, 2011


वाह भाई पथिक जी -॥//
नमन
आज आप ओज कविताके
साथ दिख गये ----
क्या खूब लिख गये ------
घनश्याम जी को रोज़ ही पढ़ते हैं -----
-शब्दों को भावनाओं में गढ़ते हैं -------
बधाई ----------------
और गुरुदेव पं .नीरव जी का
लेखन जाना पहचाना -----
सही समय पर सही निशाना ------
मजे आ रहे हैं --------
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प्रकाश प्रलय कटनी
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