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Friday, October 28, 2011

नेताजी मत्सुदा के छद्म नाम से ज़ापानी नौसेना के एक अड्डे पर ठहरे

मोहनसिंह को नौसेना के अड्डे पुंगल भेज़ दिया गया।वहां वे एक झोपडी में रहे।उनके ए०डी० सी० वी०रतन और इकबाल तथा अंगरक्षक पोहलो राय को उनके साथ की अनुमति दे दी गयी।आई०एन०ए० के कम से कम चार हज़ार सैनिकों को भीषण यातनायें दी गयीं।आई०एन०ए० के ४५ हजार सैनिकों मे से केवल ८हजार आई०एन०ए० में रहने को सहमत हुए।सी० एन० नाम्बियार को ज़र्मनी का चार्ज़ देकर सुभाष आबिद हुसैन के साथ ८फरवरी १९४३ को एक ज़र्मन पनडुब्बी में बैठकर केल से रवाना हुए।ज़र्मन पनडुब्बी मेडागास्कर में एक निर्धारित स्थान पर ज़ापानी पनडुब्बी से मिली।सुभाष ज़ापानी पनडुब्बी में बैठ गये।ज़ापानी पनडुब्बी केप आफ गुड होप का चक्कर लगाती हुई ६मई १९४३ को सुमात्रा के उत्तरी भाग में स्थित सबाना द्वीप लाई।
नेताजी मत्सुदा के छद्म नाम से ज़ापानी नौसेना के एक अड्डे पर ठहरे।वहांसे पेनांग,सैगोन,मनीला,ताइपे,हमामात्सु मे एक-एक रात रूकते हुए१६ मई १९४३ को टोकियो पहुंचे।१०जून १९४३ को ज़ापान के प्रधानमंत्री तोज़ो से सुभाष की मुलाकात करायी गयी।१४ जून को उनकी तोजो से दूसरी बार मुलाकात हुई।१६ जून को सुभाष को ज़ापानी संसद में आमंत्रित किया गया।१८ जून को सुभाष के टोकियो पहुंचने की घोषणा की गयी।१८ जून १९४३ को टोकियो रेडियो से नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने टोकियो रेडियो सरे भारतवासियों के नाम अपील प्रसारित की।
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