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Sunday, November 27, 2011

नीरव मे कर कोलाहल ,मधुमय हुए  सुरेश |
वर कर लाये मधु को ,धारा वर का  वेश ||
दाम्पत्य का पालन किया ,किया सृजन का सृजन |
करने को  परिवार  पूरा ,उत्पन्न  हुए  मनन ||
साहित्य जगत की सेवा की ,दीवाली हो या होली |
पिता की आज्ञा पालन कर ,सृजन लाये डाली की डोली ||
स्वेता {डाली}ने मानद दिया ,हुए हर्षित दादा दादी |
कभी फरौली कभी नागपुर ,बटती रही डाली  आधी आधी ||
गुलाबी नगरी की रंगत लिए ,अंकिता आँगन में आई |
भाई  मनन  दूल्हा बने , हम सब  गाएँ  बधाई  || 
ईश्वर करे फूले फले ,नीरव ,मधु ,सृजन ,मनन का परिवार |
स्वेता,मानद,अंकिता मिल भरदे ,खुशियों से सारा संसार ||
                          रजनी कान्त राजू
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